भला भागीरथी क्यों न रूठे

Written in view of the Kedarnath cloud burst event, on the prompt mentioned in the subject


kedarnath

आज से कुछ अठारह वर्ष पहले, मैं गयी थी हरिद्वार
इतनी विशाल नदी, विशाल तट, मैंने देखा था पहली बार
एक नन्ही बालक थी मैं, देख रही थी भाव विभोर
ढूँढ रही थी नीला रंग वो, सुना था जिसका अति विस्तार

तब कुछ दूर नज़रे ले जाने पर, वो रंग ढूँढ मैं पायी थी
अधिक सोच कुछ सकी नहीं मैं, दादी वापिस लेने आई थी

कुछ बढ़ी, कुछ पढ़ी, धीरे से मेरे विश्व ने लिया आकार
तब ढूँढा फिर वो रंग मैंने, आकाश में, सागर के तट पर
अखबारों में पढ़ा की यमुना नाले सी हो आई है
पर मेरे दिल में वही नदी थी, वही रंग और उससे प्यार

जब समय मिला तो उस नदी को पढ़ने मैं उसके तट पर आई थी
आंसू ढलक पड़े गालो पर, उसके तट पर जमी बड़ी काई थी

किताबें ली, पढ़ा की पीने का पानी, वहीँ से पाता है हर घर बार
तब मैं समझी बोर वैल पर, फ़िल्टर की दुकानो पर लगी कतार
फिर एक तस्वीर में संध्या आरती, देखी बनारस के घाट की
तैर रहे थे कागज़, फूल, पत्ते, दोने, द्वीप, पानी में बहने को तैयार

आरती से, रोशनी से, सुकून मिला था, पर आँखें फिर भर आई थी
निर्मल नदी में वो सब जैसे, एक सुंदरी के मुख पर मैली झाई थी

बढ़ी और कुछ, भूल गयी मैं पानी, भूल गयी नदियों का संसार
कुछ माह पहले तक, जब सुना गंगा के कहर पर हाहाकार
बाईस लोग एक भाभी के घर से, केदारनाथ को निकले थे
न वो वापस आये और न जाने कितनो पर हुआ वैसा संहार

तब नम आँखों को मैंने मूंदा, मुझे मैली गंगा यमुना दिखाई दी
कानो में “भला भागीरथी क्यों न रूठे”, आवाज़ मुझे सुनाई दी

भक्ति हो, अर्चना हो, हो हमारी कला, संस्कृति का प्रचार
पर मैं नहीं चाहती, नर, पशु, वृक्ष, बन जाएँ दुर्दशा के आहार
कर जोड़ प्रार्थना सुन लो, ए विश्व, हैं समय आज भी
वार्ना प्रकृति पहले थी, पहले हैं उसका विश्व पर अधिकार

इस विनाश से सीखा कुछ हो, ऐसी इच्छा दिल में आई थी
आँखों में वो नीला रंग था, कानो में शंख ध्वनि बज आई थी

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s